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कहा जाता है कि अगर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में छोटी उमà¥à¤° से ही पढ़ने की आदत डाल दी जाà¤, तो न सिरà¥à¤« बचà¥à¤šà¥‡ का दिमाग तेज होता है, बलà¥à¤•ि उसकी सोचने समà¤à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ बेहतर होने लगती है। हालांकि, छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाना इतना आसान à¤à¥€ नहीं है। कई बार देखा गया है कि माता पिता इसी उलà¤à¤¨ में रहते हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाना कब शà¥à¤°à¥‚ करें। साथ ही उनमें किताबें पढ़ने की आदत कैसे डालें। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ का हमारा यह लेख माता-पिता की इसी उलà¤à¤¨ को दूर करने के लिठहै। यहां हम बताà¤à¤‚गे कि कौन सी उमà¥à¤° में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाना शà¥à¤°à¥‚ कर देना चाहिà¤à¥¤ इसके अलावा यहां आपको बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ और हिंदी पढ़ाने की कà¥à¤› बेहतरीन टिपà¥à¤¸ à¤à¥€ मिलेंगी।
चलिठसबसे पहले समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना कौन सी उमà¥à¤° में सीखाना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ पà¥à¤¨à¤¾ (Reading) किस उमà¥à¤° में सीखते हैं?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पà¥à¤¨à¤¾ सीखने की सही उमà¥à¤° की बात करें तो, इस विषय पर हà¥à¤ à¤à¤• शोध से जानकारी मिलती है कि 4 महीने की उमà¥à¤° में शिशà¥à¤“ं के सामने पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• पढ़ाना शà¥à¤°à¥‚ कर देना चाहिà¤à¥¤ इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में बेहतर शिकà¥à¤·à¤¾ कौशल का विकास होता है। इस शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, जब जीवन के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीनों में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सामने पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• पà¥à¥€ जाती है या कहानी और गीत सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है, तो इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤·à¤¾ और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• का विकास होता है। साथ ही उनमें पà¥à¤¨à¥‡ की ललक à¤à¥€ पैदा होती है (1)।
हालांकि, जब बात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पढ़ने की आती है, तो सामानà¥à¤¯ तौर 3 साल की उमà¥à¤° से बचà¥à¤šà¥‡ को पढ़ाना शà¥à¤°à¥‚ किया जा सकता है। इस कà¥à¤°à¤® में कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ 4 या 5 साल की आयॠमें ही पढ़ना सीख लेते हैं। वहीं कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ 6 या 7 साल की उमà¥à¤° तक पढ़ना सीखते हैं। वहीं, कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पà¥à¤¾à¤ˆ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रà¥à¤à¤¾à¤¨ अधिक देखने को मिलता है। à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में आगे चलकर सà¥à¤•ूल में अचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक रहती है (2)। वहीं यह à¤à¥€ माना जाता है कि जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की माताà¤à¤‚ बचपन में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गणित से संबंधित खिलौने लाकर देती हैं, उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का रà¥à¤à¤¾à¤¨ गणित में अधिक देखा जाता है। इससे यह बात à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ होती है कि माता-पिता शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दौर में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सिखाने के लिठजिस विषय में अधिक रूचि दिखाते हैं, बड़े होकर बचà¥à¤šà¥‡ में उसी विषय के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अधिक रà¥à¤à¤¾à¤¨ देखने को मिलता है (3)।
यहां अब हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पà¥à¤¨à¤¾ सिखाने के कà¥à¤› आसान तरीकों के बारे में बताà¤à¤‚गे।
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना कैसे सिखाà¤à¤‚?
छोटे बचà¥à¤šà¥‡ को पढ़ना सिखाने के लिठकà¥à¤› अहम बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना बहà¥à¤¤ जरूरी है। नीचे हम उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ बातों का जिकà¥à¤° कर रहे हैं, जिनकी मदद से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आसानी से पढ़ना सिखाया जा सकता है (4)।
पढ़ना सिखाने के कौशल को समà¤à¥‡à¤‚ – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना सिखाने से पहले माता-पिता को पढ़ना सिखाने के कौशल को समà¤à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤ बता दें कि पढ़ना सिखाने के लिठकई पà¥à¤°à¤•ार के कौशल की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार है –
शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ की धà¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को जोड़ तोड़ कर सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ का कौशल।
अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ की धà¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बीच के संबंध को पहचानने का कौशल।
किताबों में लिखे हà¥à¤ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को समà¤à¤¨à¥‡ का कौशल।
शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ उसे सही गति के साथ ठीक से पढ़ने का कौशल।
किताब का सही चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करें- पढ़ाने के कौशल को समà¤à¤¨à¥‡ के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना सिखाने के लिठहमेशा उसके लिठउसकी उमà¥à¤° के हिसाब से ही किताबों का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करें। अगर बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° 6 महीने से कम की है, तो उसके लिठपà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• वाली किताबों का उपयोग करें। वहीं, अगर बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• साल से अधिक का है, तो उसे चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ और शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ वाली सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ दें। इसके अलावा अगर बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° दो साल या उससे अधिक है। तो à¤à¤¸à¥‡ में उसे à¤à¤¸à¥€ किताबें दें, जिसमें वो कहानी और शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ की पहचान कर सके और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समठसके।
कविताओं और गीतों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाने के लिठनरà¥à¤¸à¤°à¥€ के कविताओं और गानों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें। इन कविताओं को उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गाकर सà¥à¤¨à¤¾à¤à¤‚। आमतौर पर यह देखा जाता है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सरल शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के गाने जलà¥à¤¦à¥€ याद हो जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में अगर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कविताओं और गीतों को गाकर पढ़ाया जाà¤à¤—ा, तो बचà¥à¤šà¥‡ उसकी तरफ जलà¥à¤¦à¥€ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ होंगे साथ ही उनकी रूचि à¤à¥€ बढ़ेगी।
किताबों पर उंगलियां रखकर पढ़ाà¤à¤‚ – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना सिखाने के लिà¤, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ-साथ माता-पिता को à¤à¥€ पढ़ना चाहिà¤à¥¤ साथ ही पढ़ते समय अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ पर उंगलियां रखें। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ होगा। इससे बचà¥à¤šà¥‡ पढ़ाठजाने वालों अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ या शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को आसानी से पहचान सकेंगे।
सरल शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का कारà¥à¤¡ बनाà¤à¤‚ – घर पर ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसरल शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का कारà¥à¤¡ बनाà¤à¤‚, जिसमें जानवर या खिलौनों के नाम हों। जैसे :- ठफॉर à¤à¤ªà¥à¤ªà¤², बी फॉर बैट, सी फॉर- कैट आदि। फिर इन नामों को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोलना सिखाà¤à¤‚ और उस कारà¥à¤¡ को चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के लिठदें। इस तरह से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤²à¤¾ के अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ की समठहोगी और सीखने में उनकी रूचि à¤à¥€ बढ़ेगी।
अरà¥à¤¥ समà¤à¤¾à¤•र जोर से पढ़ना सिखाà¤à¤‚ – किताबों में दिठगठकविताओं को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जोर-जोर से पढ़ना सिखाà¤à¤‚ साथ ही उसका अरà¥à¤¥ à¤à¥€ समà¤à¤¾à¤à¤‚। अगर बचà¥à¤šà¥‡ कविता का अरà¥à¤¥ समठजाà¤à¤‚गे, तो वह उसे आसानी से याद à¤à¥€ रख पाà¤à¤‚गे और बेहतर तरीके से पॠà¤à¥€ पाà¤à¤‚गे।
किताबों के पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग के माधà¥à¤¯à¤® से समà¤à¤¾à¤à¤‚ – आम तौर पर देखा जाता है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कारà¥à¤Ÿà¥‚न में अधिक रà¥à¤šà¤¿ होती है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाने के लिठकिताबों में दिठगठपातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं, तो बचà¥à¤šà¥‡ आसानी से समठजाà¤à¤‚गे साथ ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का मन पढ़ाई में लगा रहेगा।
शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का खेल खिलाà¤à¤‚ – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना सिखाने के लिठखेल के माधà¥à¤¯à¤® को à¤à¥€ अपनाया जा सकता है। इसके लिठघर में ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठइनडोर गेमà¥à¤¸ के तौर पर शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का खेल खेलाà¤à¤‚। जैसे :- A से लेकर Z तक के अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ वाले टॉयज को आपस में मिला दे। फिर कà¥à¤°à¤®à¤µà¤¾à¤° तरीके के उसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के लिठकहें साथ ही उस अकà¥à¤·à¤° को बोलने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करें।
कविताओं और कहानियों को à¤à¤¾à¤—ों में बांट कर पढ़ाà¤à¤‚ – कहानियां बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठबहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• मानी जाती हैं। इससे वे बहà¥à¤¤ कà¥à¤› सीखते हैं। इसलिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पढ़ाने के लिठकहानी या फिर कविताओं की मदद ली जा सकती है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ना सिखाने के लिठपढ़ाई जाने वाली कविताओं और कहानियों को कई à¤à¤¾à¤—ों में बांट लें। फिर बारी-बारी से उन à¤à¤¾à¤—ों को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाà¤à¤‚। इस तरह से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कहानी या कविता à¤à¤¾à¤°à¥€ नहीं लगेगी और वे उसे आसानी से याद रख पाà¤à¤‚गे और पढ़ à¤à¥€ सकेंगे।
चितà¥à¤° बनाकर पढ़ाà¤à¤‚ – à¤à¤¸à¤¾ अकà¥à¤¸à¤° देखा गया है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ में अधिक रूचि रहती है। इसलिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाने के लिठइस तरीके को à¤à¥€ अपनाया जा सकता है। इसके लिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जो शबà¥à¤¦ पढ़ाना चाहते हैं, सबसे पहले उसका चितà¥à¤° बनाà¤à¤‚ फिर उसे बचà¥à¤šà¥‡ को पहचाने के लिठकहें। जैसे :- अगर ठफॉर à¤à¤ªà¥à¤ªà¤² बताना चाह रहे हैं, तो सेब का चितà¥à¤° बनाà¤à¤‚। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ में पढ़ाई के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रà¥à¤šà¤¿ à¤à¥€ बढ़ेगी। साथ ही उनमें चीजों को याद रखने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का à¤à¥€ विकास होगा।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पूछें – अगर बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° 3 साल से अधिक की है, तो उसे पढ़ाने के बाद पà¥à¤¾à¤ गठविषय से संबंधित पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पूछें। वहीं आप चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ को दिखाकर उसे पहचानने के लिठà¤à¥€ कह सकते हैं। à¤à¤¸à¤¾ करने से बचà¥à¤šà¥‡ की सोचने और समà¤à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में बढ़ोतरी होगी।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ बढ़ाते रहें – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पढ़ाते समय बीच-बीच में उनका उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤µà¤°à¥à¤§à¤¨ करते रहें। जब बचà¥à¤šà¤¾ किसी नठशबà¥à¤¦ को ठीक से बोलने या पढ़ने लगे, तो उसकी तारीफ करें। इससे उनका उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ और आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ बढ़ेगा। इससे वह आगे चलकर अचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करेंगे।
धैरà¥à¤¯ रखें और गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ न करें – बचà¥à¤šà¥‡ को पढ़ाते समय धैरà¥à¤¯ जरूर रखें और गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ न करें। हो सकता है कि कà¤à¥€-कà¤à¥€ बचà¥à¤šà¤¾ किसी चीज को सीखने में अधिक समय लगाठया फिर बार-बार गलती करे। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में उसे डांटें नहीं बलà¥à¤•ि पà¥à¤¯à¤¾à¤° से समà¤à¤¾à¤à¤‚। अगर माता-पिता बचà¥à¤šà¥‡ को डांटते हैं, तो इससे बचà¥à¤šà¥‡ के मन में डर बैठजाà¤à¤—ा और वह कà¥à¤› à¤à¥€ नया करने या सवाल पूछने से डरेगा। इससे उनके पà¥à¤¨à¥‡ और सीखने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होगी, जो उनके à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के लिठठीक नहीं है।
लेख के इस à¤à¤¾à¤— में जानिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ पढ़ना कैसे सिखाà¤à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ पढ़ना कैसे सिखाà¤à¤‚?
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ पढ़ना सिखाने के लिठसबसे पहले जरूरी है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलà¥à¤«à¤¾à¤¬à¥‡à¤Ÿ और वॉवेल की पहचान कराई जाà¤à¥¤ इसके लिठआप निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीकों को अपना सकते हैं :
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वॉवेल (a,e,i,o,u) की पहचान कराने के लिठसबसे पहले à¤à¤• पेज में पूरे अलà¥à¤«à¤¾à¤¬à¥‡à¤Ÿ को लिखे और उसमें से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पांचों वॉवेल की पहचान कर उसे गोल घेरे में करने के लिठकहें।
इसके अलावा, à¤à¤• वरà¥à¤•शीट बनाकर à¤à¥€ उसमें बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वॉवेल और बाकी के कॉनà¥à¤¸à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ट लिखने के लिठकह सकते हैं। अगर बचà¥à¤šà¤¾ वॉवेल और कॉनà¥à¤¸à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ट की पहचान करना सीख जाता है, तो इसका मतलब है कि बचà¥à¤šà¤¾ अब इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ सीखने के लिठतैयार है।
इसके बाद बारी-बारी से वॉवेल के अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ से शबà¥à¤¦ बनाना सिखाà¤à¤‚ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बोलना सिखाà¤à¤‚। ताकी बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वे अकà¥à¤·à¤° याद हो जाà¤à¤‚। इसके लिठआप वरà¥à¤• शीट बना सकते हैं, (जैसे- a + g = ag (à¤à¤—) )। अब इसे बोलना सिखाà¤à¤‚। इससे बचà¥à¤šà¥‡ a बोलना सीख जाà¤à¤‚गें। इसी तरह बाकी वॉवेल शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का à¤à¥€ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ कराà¤à¤‚।
जब बचà¥à¤šà¥‡ दो अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ से बने शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को पढ़ना सीख जाà¤à¤‚, तो फिर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तीन अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ के शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को बोलना सिखाà¤à¤‚ (जैसे – इससे पहले उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ag (à¤à¤—) बोलना सिखाया था, अब इसके आगे में b लगाकर शबà¥à¤¦ बनाà¤à¤‚ bag (बैग) और उसे बोलना सिखाà¤à¤‚)।
अब बारी आती है, चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को शबà¥à¤¦ पहचानना सिखाने की। माना जाता है कि चितà¥à¤° बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ को तेज बना सकते हैं। इसलिठबचà¥à¤šà¥‡ को जो à¤à¥€ शबà¥à¤¦ सिखाना चाहते हैं, उसका चितà¥à¤° बनाà¤à¤‚। जैसे- अगर बचà¥à¤šà¥‡ को bag बोलना सिखाना चाहते हैं, तो à¤à¤• बैग यानी बसà¥à¤¤à¥‡ की चितà¥à¤° बनाà¤à¤‚। अगर बचà¥à¤šà¤¾ चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ को ठीक से पहचान ले रहा है, तो इसका मतलब है कि बचà¥à¤šà¥‡ में पढ़ने का कौशल धीरे-धीरे विकसित हो रहा है।
जब बचà¥à¤šà¤¾ इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को अचà¥à¤›à¥‡ से सीख लेता है, तो फिर उन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को जोड़ कर वाकà¥à¤¯ बनाना सिखाà¤à¤‚। जैसे अगर बचà¥à¤šà¤¾ कैट (cat) बोलना सीख जाà¤, तो उसे सिखाà¤à¤‚ कैट ऑन ‘अ’ मैट (cat on a mat)।
इसी तरह आगे के वॉवेल के लिठà¤à¥€ वरà¥à¤•शीट बनाकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ पढ़ना सिखाà¤à¤‚। इससे बचà¥à¤šà¥‡ में पà¥à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बà¥à¥‡à¤—ी और वह सà¥à¤ªà¥‡à¤²à¤¿à¤‚ग में गलतियां à¤à¥€ नहीं करेगा।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठइंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ वरà¥à¤•शीट – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ को मजबूत करने के लिठमाता-पिता लेख में दी गई इस वरà¥à¤•शीट को डाउनलोड कर सकते हैं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आसानी से इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ लिखने और बोलने का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करा सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हिंदी पढ़ना कैसे सिखाà¤à¤‚?
बचà¥à¤šà¥‡ को इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ पढ़ना सिखाने के बाद अब बारी आती है, बचà¥à¤šà¥‡ को हिंदी पढ़ना सिखाने की। बता दें कि बचà¥à¤šà¥‡ को हिंदी सिखाने के लिठउसे सबसे पहले बिना मातà¥à¤°à¤¾ वाले शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को पढ़ना सिखाà¤à¤‚। तो चलिठजानते हैं बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हिंदी पढ़ाने की :
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हिंदी सिखाने के लिठसबसे पहले उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सारे वरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤²à¤¾ में शामिल अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ से परिचित कराà¤à¤‚। इसके लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बारी-बारी से वरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤²à¤¾ लिख कर उसे पढ़ना सिखाà¤à¤‚। जैसे – क,ख,ग,घ…….आदि।
जब बचà¥à¤šà¥‡ वरà¥à¤£à¤®à¤¾à¤²à¤¾ बोलना सीख जाà¤à¤‚, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बिना मातà¥à¤°à¤¾ वाले शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ से परिचित कराà¤à¤‚। इसके लिठआप à¤à¤• वरà¥à¤•शीट तैयार करें, जिसमें साइड में तीन चार शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को लिख दें और फिर बीच में गोला बनाकर à¤à¤• शबà¥à¤¦ को डालें और बचà¥à¤šà¥‡ से कहें कि गोले में दिठगठशबà¥à¤¦ को जोड़कर अधूरे शबà¥à¤¦ को पूरा करे और उसे पढ़े। जैसे – अनब + न = अनबन, उपव + न = उपवन।
बचà¥à¤šà¤¾ जब वरà¥à¤£à¥‹à¤‚ को पहचानना सीख जाà¤, तो फिर उसे खाली सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में वरà¥à¤£à¥‹à¤‚ को à¤à¤°à¤¨à¤¾ सिखाà¤à¤‚। (जैसे – दम_ल = न/क)। इस तरह की शीट बनाकर बचà¥à¤šà¥‡ को दें और उसे वहां पर सही वरà¥à¤£ à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठकहें। इससे बचà¥à¤šà¥‡ की मानसिक कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ विकसित होगी।
इसके बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को पूरा करना सिखाà¤à¤‚ और उसे बोलने के लिठकहें। (जैसे- खटमल का चितà¥à¤° बनाà¤à¤‚ और उसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पहचानने के लिठकहें या फिर, _टमल लिखकर आगे में उस गायब वरà¥à¤£ को à¤à¤° कर शबà¥à¤¦ पूरा करने के लिठकहें)।
इसके अलावा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वरà¥à¤£à¥‹à¤‚ को जोड़कर à¤à¤• साथ लिखकर बोलने के लिठà¤à¥€ कह सकते हैं। जैसे कि आप à¤à¤• शीट पर ‘द म क ल’ लिख दें और बचà¥à¤šà¥‡ को उसे जोड़ कर पढ़ने के लिठकहें और फिर उसे लिखवाà¤à¤‚।
जब बचà¥à¤šà¤¾ यह सारी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अचà¥à¤›à¥‡ से सीख जाता है, तो उसे फिर चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ वाली कविताओं को धीरे-धीरे पढ़ना सिखाà¤à¤‚।
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